Sindhu Ghati Sabhyata: सिंधु घाटी सभ्यता को लेकर हुआ बड़ा खुलासा, इस तरह हुआ था सिंधु घाटी सभ्यता का पतन

Sindhu Ghati Sabhyata: हम सभी बचपन से ही सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में पढ़ते हैं और सुनते आए हैं आए दिन इसकी चर्चा होती रहती है खासकर इतिहास में दिलचस्पी रखने वालों और कंपटीशन की तैयारी करने वालों में इसका बढ़ा क्रेज है कहा जाता है कि विश्व में सबसे लंबी संरक्षण बताओ में से एक सिंधु सभ्यता थी हजारों साल पहले यहां के लोग का जीवन यापन काफी हाईटेक हुआ करता था यहां के लोग आभूषण प्रेमी थे व्यापार करते थे इनकी सड़कें चौड़ी होती थी. नालियों का काफी सुनियोजित तरीके से बनाया गया था ऐसा कहा जाता है कि 42 साल पहले ही यहां के लोग काफी आधुनिक पहुंच चुके थे लेकिन कहावत है कि जो भी बना है या जन्मा है उसका अंत निश्चित है इसके लिए अब अभी सभ्यता का नामोनिशान नहीं बचा हुआ है.

यह दुनिया की सबसे पहली शहरी संस्कृति मान्य जा सकती है जहां पर पीने के कुए को 2y गए थे पानी की निकासी का प्रबंध था एक ऐसा शहर बनाया गया था जो चारों तरफ से सुरक्षित था और 42 साल पहले जीवन का सबसे आसान तरीका बताया गया था.

अब बता को लेकर हुआ बड़ा खुलासा जाने आपकी

उत्तराखंड में स्थित एक गुफा में प्राचीन चट्टान के बनने पर किए गए एक हालिया रिसर्च में सिंधु सभ्यता के अंत से जुड़ा बड़ा खुलासा हुआ है अब तक के सबसे बड़े शोध में यह सामने आया है कि लंबे समय तक रहीम सूखे की स्थिति सिंधु सभ्यता के पतन का कारण हो सकती है पढ़ाई के मुताबिक इस साल की शुरुआत करीब 42 साल पहले हुई और वह करीब 200 साल तक रहा यह वह काल था जो महानगर निर्माण सिंधु सभ्यता के पुनर्गठन के साथ मेल खाता है यह सब बता अखंड भारत यानी वर्तमान में पाकिस्तान और समूचे भारत तक फैली हुई है.

कितनी बार आई भुखमरी की नौबत

पत्रिका कम्युनिकेशन अर्थ एंड एनवायरमेंट में प्रकाशित शोध में शोधकर्ताओं ने इस खुशखबरी के दौरान कम से कम तीन दीर्घकालिक सुखों की पहचान की जिनमें से प्रत्येक की अवधि 25 से 90 वर्ष थी.

ब्रिटेन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय में अध्ययन के सह लेखक प्रोफेसर कैमरन बैटरी ने कहा हमें इस बात के स्पष्ट सबूत मिलते हैं कि यह अंतराल एक अल्पकालिक संकट नहीं था बल्कि उन पर्यावरण लिया परिस्थितियों का एक प्रगतिशील परिवर्तन था जहां सिंधु सभ्यता के लोग रहते थे.

शोधकर्ता में उत्तराखंड में चित्तौड़गढ़ के पास एक गुफा में बने सेंटा लगाई मेंट में विकसित परसों का दिन भर के ऐतिहासिक वर्ष की सारणी तैयार की स्टेलेजमैट एक प्रकार की चट्टान का निर्माण है जो एक गुफा के तल से बना हुआ है.

उन्होंने आपसे जन कारबन और कैल्शियम संस्थान को कि सहित पर्यावरणीय अनुरेखक की एक श्रृंखला को माफ करें उन्हें निर्माण की प्रक्रिया अपनाई और मौसम के संक्षेप वर्षा को दर्शाता जानकारी के प्रति है.

अध्ययन के दौरान टीम में सूखे के समय और अवधि का आमंत्रित कैसे जाने के लिए उच्च परी सुनता वाले यूरेनियम श्रंखला डेटिंग का भी इस्तेमाल किया है.

इस प्रकार हुआ अंत

कैंब्रिज के पृथ्वी विज्ञान विभाग में पीएचडी के हिस्से के रूप में शोध करने वाले अध्ययन के प्रमुख लेखिका अलीना ने कहा कि कई साक्ष्य में इस सूखे की प्रकृति को हर दृष्टिकोण से एक साथ देखने को अनुमति देता है और पुष्टि करते हैं कि एक स्थिति के कारण दूसरी स्थिति बदलेगी.

अलीना और शोध टीम में गर्मियों और सर्दियों दोनों मौसम में औसत से कम वर्ष अलग-अलग राज्यों की पहचान की बैटरी ने कहा मानव आबादी पर जलवायु परिवर्तन की इस अवधि के प्रभाव को समझने के लिए दोनों फसलों के मौसम को प्रभावित करने वाले सूखे के साथ से बेहद महत्वपूर्ण है निष्कर्ष से मिले साक्ष्य इस बात की ओर इशारा करते हैं कि सिंधु महानगर का पतन जलवायु परिवर्तन से हुआ था.

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